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Friday, February 7, 2014
Thursday, February 6, 2014
Wednesday, February 5, 2014
Tuesday, February 4, 2014
Monday, February 3, 2014
Sunday, February 2, 2014
हर किसी के आगे
हर किसी के आगे मत गिड़गिड़ाओ ,अपना काम खुद करो ,अपने अंदर दोष मत निकालो ,वीर बनो ,गिड़गिड़ाओ तो भगवान् के आगे
गिड़गिड़ाओ
Fwd: [AMRIT VANI ] भगवान् के
Saturday, February 1, 2014
Thursday, January 30, 2014
Fwd: [VISHWA JAGRITI MISSION] WORDS OF WISDOM FOR TODAY FROM GURUVAR
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Fwd: [Divye Nirmal Dham Ashram( Vjm Nagpur)] कुछ रत्न हैं कुछ काँच हैं; काँच की थोड़ी देर के...
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Fwd: [VISHWA JAGRITI MISSION] ISHWAR ME AASTHA SBSE BDI SHAKTI HAI :
---------- Forwarded message ----------
From: Seema Sonawane <notification+zvefelze@facebookmail.com>
Date: Thu, Jan 30, 2014 at 9:53 AM
Subject: [VISHWA JAGRITI MISSION] ISHWAR ME AASTHA SBSE BDI SHAKTI HAI :
To: VISHWA JAGRITI MISSION <v1j2m3@groups.facebook.com>
From: Seema Sonawane <notification+zvefelze@facebookmail.com>
Date: Thu, Jan 30, 2014 at 9:53 AM
Subject: [VISHWA JAGRITI MISSION] ISHWAR ME AASTHA SBSE BDI SHAKTI HAI :
To: VISHWA JAGRITI MISSION <v1j2m3@groups.facebook.com>
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Fwd: [Sarathi (Vjm mumbai mandal)] : बंधन का क्रम :
---------- Forwarded message ----------
From: Anil Singh <notification+zvefelze@facebookmail.com>
Date: 2014-01-30
From: Anil Singh <notification+zvefelze@facebookmail.com>
Date: 2014-01-30
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Wednesday, January 29, 2014
Fwd: [AMRIT VANI ] ashirvad guru ka
---------- Forwarded message ----------
From: Madan Gopal Garga LM VJM <mggarga@gmail.com>
Date: Wed, Jan 29, 2014 at 7:17 PM
Subject: [AMRIT VANI ] ashirvad guru ka
To: mggarga@gmail.com
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Posted By Madan Gopal Garga LM VJM to AMRIT VANI at 1/29/2014 07:17:00 PM
From: Madan Gopal Garga LM VJM <mggarga@gmail.com>
Date: Wed, Jan 29, 2014 at 7:17 PM
Subject: [AMRIT VANI ] ashirvad guru ka
To: mggarga@gmail.com
--
Posted By Madan Gopal Garga LM VJM to AMRIT VANI at 1/29/2014 07:17:00 PM
Fwd: [AMRIT VANI ] galatfahami
---------- Forwarded message ----------
From: Madan Gopal Garga LM VJM <mggarga@gmail.com>
Date: Wed, Jan 29, 2014 at 7:16 PM
Subject: [AMRIT VANI ] galatfahami
To: mggarga@gmail.com
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Posted By Madan Gopal Garga LM VJM to AMRIT VANI at 1/29/2014 07:16:00 PM
From: Madan Gopal Garga LM VJM <mggarga@gmail.com>
Date: Wed, Jan 29, 2014 at 7:16 PM
Subject: [AMRIT VANI ] galatfahami
To: mggarga@gmail.com
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Posted By Madan Gopal Garga LM VJM to AMRIT VANI at 1/29/2014 07:16:00 PM
Tuesday, January 28, 2014
Fwd: [AMRIT VANI ] sachchee daulat
Fwd: [AMRIT VANI ] apane jeevan main
Monday, January 27, 2014
Fwd: [AMRIT VANI ] manushyta
Fwd: [AMRIT VANI ] durbalta
Saturday, January 25, 2014
Fwd: [AMRIT VANI ] gjarko bhool jao
Subject: [AMRIT VANI ] gjarko bhool jao
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Posted By Madan Gopal Garga LM VJM to AMRIT VANI at 1/25/2014 07:35:00 PM
Fwd: [AMRIT VANI ] ichhaen
Subject: [AMRIT VANI ] ichhaen
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Posted By Madan Gopal Garga LM VJM to AMRIT VANI at 1/25/2014 07:32:00 PM
Fwd: [AMRIT VANI ] apane saath
---------- Forwarded message ----------
From: Madan Gopal Garga LM VJM <mggarga@gmail.com>
Date: Sat, Jan 25, 2014 at 10:41 AM
Subject: [AMRIT VANI ] apane saath
To: mggarga@gmail.com
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Posted By Madan Gopal Garga LM VJM to AMRIT VANI at 1/25/2014 10:41:00 AM
From: Madan Gopal Garga LM VJM <mggarga@gmail.com>
Date: Sat, Jan 25, 2014 at 10:41 AM
Subject: [AMRIT VANI ] apane saath
To: mggarga@gmail.com
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Posted By Madan Gopal Garga LM VJM to AMRIT VANI at 1/25/2014 10:41:00 AM
Friday, January 24, 2014
Fwd: [AMRIT VANI ] guru sandesh
Subject: [AMRIT VANI ] guru sandesh
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Posted By Madan Gopal Garga LM VJM to AMRIT VANI at 1/24/2014 10:27:00 AM
Fwd: [AMRIT VANI ] divya chakshu
Subject: [AMRIT VANI ] divya chakshu
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Posted By Madan Gopal Garga LM VJM to AMRIT VANI at 1/24/2014 10:23:00 AM
Thursday, January 23, 2014
बेटी के सुखी जीवन के लिए
बेटी के सुखी जीवन के लिए
* ससुराल पक्ष के लोग और उसके पति को उनकी आदतें,
स्वभाव , रुचियाँ समझने और उनके साथ तालमैल मिलाने का अवसर है !
* हर बात में बेटी का पक्ष न लें ! उसे त्याग ,समर्पण ,सहयोग ,
एवं प्रत्येक के साथ मधुर व्यवहार की शिक्षा दें !
* ससुराल वाले बहू को बेटी मानें यह बहुत अच्छा हे लेकिन
बहू ससुराल में स्वंय को बेटी मानने की भूल कभी न करे !
*क्योकि बेटी अपने माता पिता के घर में माता-पिता और भाइ -बहन इत्यादि से
अपेक्षा और अपने कार्य के प्रति उपेक्षा रखे तो चलता है लकिन ससुराल में
यही अपेक्षा और उपेक्षा भारी कष्ट का कारण बनती है !
* अगर किसी से कोई कठोर बात कहने की आवश्यकता पडे यो उसे मधुर शब्दों में
ही कहना चाहिए !
* पति के घर में सबकुछ पिता के घर जैसा कभी नही होता !
इसलिए बेटी को ससुराल में ससुराल की परिस्थितियां ,वहां क्र अभाव -
प्रभाव ,लोकरीति,व्यवहार ,रीति तथा कुल परम्पराओं के अनुसार जीवन जीने की
प्रेरणा दें !
*अगर कोई अच्छी बात अच्छी आदत को बेटी वहां के लोगों में
डालना चाहती हे तो बडी सावधानी ,धैर्य एवं धीरे धीरे और उसका स्वयं आचरण
करके प्रारंभ करे अन्यथा वहां के लोगो का अहंइसे सहन नहीं कर पायेगा!
*पति को उसके माता पिता ,भाई बहन के प्रति दायित्वों से विमुख करने का
प्रयास कभी न करें इससे मनों में कटुता आती है !
*स्त्री पर तीन कुलों के निर्माण का दायित्व होता है उसे इस गरिमा को कभी
नहीं भूलना चाहिए !
*इस महान कार्य की पूर्ति वह प्रेम ,सहनशीलता सदव्यवहार ,सदाचरण एवं
त्यागपूर्ण जीवन से ही कर सकती हैं !
धर्मदूत जुलाइ 2010 से !
* ससुराल पक्ष के लोग और उसके पति को उनकी आदतें,
स्वभाव , रुचियाँ समझने और उनके साथ तालमैल मिलाने का अवसर है !
* हर बात में बेटी का पक्ष न लें ! उसे त्याग ,समर्पण ,सहयोग ,
एवं प्रत्येक के साथ मधुर व्यवहार की शिक्षा दें !
* ससुराल वाले बहू को बेटी मानें यह बहुत अच्छा हे लेकिन
बहू ससुराल में स्वंय को बेटी मानने की भूल कभी न करे !
*क्योकि बेटी अपने माता पिता के घर में माता-पिता और भाइ -बहन इत्यादि से
अपेक्षा और अपने कार्य के प्रति उपेक्षा रखे तो चलता है लकिन ससुराल में
यही अपेक्षा और उपेक्षा भारी कष्ट का कारण बनती है !
* अगर किसी से कोई कठोर बात कहने की आवश्यकता पडे यो उसे मधुर शब्दों में
ही कहना चाहिए !
* पति के घर में सबकुछ पिता के घर जैसा कभी नही होता !
इसलिए बेटी को ससुराल में ससुराल की परिस्थितियां ,वहां क्र अभाव -
प्रभाव ,लोकरीति,व्यवहार ,रीति तथा कुल परम्पराओं के अनुसार जीवन जीने की
प्रेरणा दें !
*अगर कोई अच्छी बात अच्छी आदत को बेटी वहां के लोगों में
डालना चाहती हे तो बडी सावधानी ,धैर्य एवं धीरे धीरे और उसका स्वयं आचरण
करके प्रारंभ करे अन्यथा वहां के लोगो का अहंइसे सहन नहीं कर पायेगा!
*पति को उसके माता पिता ,भाई बहन के प्रति दायित्वों से विमुख करने का
प्रयास कभी न करें इससे मनों में कटुता आती है !
*स्त्री पर तीन कुलों के निर्माण का दायित्व होता है उसे इस गरिमा को कभी
नहीं भूलना चाहिए !
*इस महान कार्य की पूर्ति वह प्रेम ,सहनशीलता सदव्यवहार ,सदाचरण एवं
त्यागपूर्ण जीवन से ही कर सकती हैं !
धर्मदूत जुलाइ 2010 से !
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